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श्रीमती स्नेहिल पाण्डेय जी - अध्यक्ष, सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान

श्रीमती स्नेहिल पाण्डेय जी प्रतिष्ठित लेखिका एवं समाज सेविका हैं। आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि ऐसी रही है कि आपने बचपन से ही अपने परिवार के लोगों को वंचित एवं असहाय जनों की सेवा करते देखा है। आपका हृदय पीड़ित जनमानस को देखकर द्रवित होता है, जिसके कारण आपने आगे बढ़कर बतौर समाज सेविका आम जनमानस की सेवा का व्रत लिया। प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान की अध्यक्ष बनने के पूर्व से ही समाज के उत्थान में आपकी भूमिका सराहनीय रही है। आपकी करुणामयी दृष्टि के कारण ही अनेक निराश्रित बच्चों को आश्रय मिल सका है। वृद्धजनों की सेवा के निमित्त आपके प्रयास से लखनऊ ,कानपुर ,नैमिषारण्य, हरदोई एवं झांसी में वृद्धा आश्रमों का संचालन किया जा रहा है। नारी सशक्तिकरण की दिशा में आपके द्वारा किए जा रहे कार्य समाज को एक नई दृष्टि प्रदान करने वाले हैं। आपकी संस्था के द्वारा वृंदावन में महिला आश्रय सदन ‘कृष्णा कुटीर’ का संचालन भी किया जा रहा है। आपके सेवा कार्य को दृष्टिगत रखते हुए प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था ‘भारत विकास परिषद’के द्वारा आपको ‘अहिल्याबाई होलकर सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है।’परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ जैसी पंक्ति आपके मन मस्तिष्क में सदैव बनी रहती है जिसके कारण आप आश्रमों में निरंतर प्रवास करती रहती हैं एवं व्यवस्था के निमित अपने सहयोगियों का मार्गदर्शन करती रहती हैं। अध्ययन में विशेष रुचि होने के कारण आपके विचार नित्य नवीन होते हैं और वही नवीनता आपके लेखन में भी दिखाई पड़ती है।

डॉ. शीर्षेन्दु शील त्रिवेदी – निदेशक, सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान

डॉ. शीर्षेन्दु शील त्रिवेदी एक समर्पित शिक्षाविद्, समाजसेवी और बहुआयामी व्यक्तित्व धनी हैं, जिन्होंने अपने छात्र जीवन से ही शिक्षा के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। स्नातकोत्तर में अध्ययन के दौरान से ही उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षित करने का कार्य प्रारंभ किया और वर्ष 2004 में एक सफल कोचिंग संस्थान की स्थापना की, जहाँ से अनेक विद्यार्थी डॉक्टर और अन्य प्रतिष्ठित पेशेवर बनकर निकले।

उनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ अत्यंत उल्लेखनीय हैं — उन्होंने M.Sc. (प्राणीशास्त्र, वनस्पति शास्त्र), B.Ed., LL.M., MBA, MSW, तथा M.A. (हिन्दी, शिक्षा, इतिहास, समाजशास्त्र) में उपाधियाँ प्राप्त की हैं। साथ ही उन्होंने प्राणीशास्त्र में डॉक्टरेट (Ph.D.) की उपाधि अर्जित की है।

सरकारी जूनियर विद्यालय में अध्यापक के रूप में सेवा देते हुए भी उन्होंने सदैव समाज के उत्थान का विचार मन में रखा। अंततः उन्होंने अपनी स्थायी नौकरी त्यागकर पूर्ण रूप से सामाजिक कार्य को समर्पित करने का निर्णय लिया। वर्तमान में वे सर्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और शिक्षा, वृद्धजन कल्याण तथा सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

उनका जीवन प्रेरणा देता है कि समर्पण, शिक्षा और सेवा की भावना से समाज में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।

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